पश्चिम बंगाल चुनाव में हारने के बाद टूटी पूर्व मुख्यमंत्री की पार्टी एक बार फिर जुड़ती नजर आ रही है। दरअसल, इसके संकेत हाल ही में विधायक हमीदुल रहमान की वापसी के ऐलान से मिले हैं। इससे पहले भी बागी नेता ममता बनर्जी के नेतृत्व की तारीफ कर चुके हैं। हालांकि, इसे लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है कि आने वाले समय में और भी नेता वापसी करेंगे। वहीं, टीएमसी में विधानसभा चुनाव के बाद पार्षद से लेकर सांसद स्तर तक में टूट हुई थी।
संघवाद प्रतिदिन के अनुसार, चोपड़ा विधायक रहमान ने मंगलवार को पार्टी नेताओं के साथ बड़ी मीटिंग की थी। दरअसल, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के चलते रहमान पार्टी गतिविधियों से इससे पहले तक दूर बताए जा रहे थे। ताजा बैठक में ही उन्होंने ममता बनर्जी को अपना नेता माना है। साथ ही कहा है कि वह हमेशा ममता बनर्जी के समर्थक रहे हैं।
पार्टी बदलने की अटकलें
रिपोर्ट के अनुसार, पहले कहा जा रहा था कि रहमान ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर बागी गुट ज्वाइन कर लिया है। उन्होंने अब कहा, 'मैं हमेशा ममता बनर्जी का फॉलोअर रहा हूं। मैं तृणमूल के चिह्न पर चुना गया था। मैं ममता को पार्टी का नेता मानता हूं। वह पार्टी की हाई कमान हैं।' फिलहाल, उनकी इस टिप्पणी पर ममता गुट की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
उन्होंने बागी गुट में जाने को लेकर कहा था, 'मैंने संसदीय हितों के चलते और विपक्ष के लिए ऑफिस परिसर को लेकर साइन करने पर सहमति जताई थी। हालांकि, तब यह साफ नहीं था कि ऋताब्रत बाबू अलग राजनीतिक दल बना लेंगे या अलग फैसले लेने लगेंगे।'
खास बात है कि इससे पहले कासिम सिद्दीकी ने औपचारिक रूप से ऋताब्रत कैंप छोड़ने का ऐलान कर दिया था। वहीं, कुछ दिन पहले रतिन घोष भी ममता बनर्जी को अपना नेता बता चुके हैं।
ममता बनर्जी ने दिया था 15 दिनों का समय
अक्टूबर के पहले सप्ताह में ममता बनर्जी ने बागियों को लौटने के लिए 15 दिनों का समय दिया था। तब दिनाजपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था, 'हमारी मदद से जीते कई विधायक और सांसद गद्दार हो गए हैं। उनकी यहां कोई जगह नहीं है...। हम वापसी करेंगे। आप असली तृणमूल हैं। हमें छोड़कर गए विधायकों और सांसदों के लिए यह बात है कि अगर वो 15 दिनों में लौट आते हैं तो ठीक है। अगर ऐसा नहीं तो उनके लिए जगह नहीं है।'
चुनाव में अलग उतरे दोनों गुट
खास बात है कि हाल ही में हुए रेजीनगर और नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव में ममता बनर्जी और ऋताब्रत गुट अलग नजर आए थे। दोनों ने ही सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। एक सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के छोड़ने के बाद खाली हुई थी। वहीं, रेजीनगर से विधायक आम जनता उन्नयन पार्टी नेता हुमायूं कबीर ने इस्तीफा दिया था। दोनों ही सीटों पर भाजपा जीती थी।
चुनाव चिह्न और नाम फ्रीज
खास बात है कि भारत निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस नाम और दो जोड़ा फूल चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया है। इसका मतलब है कि कोई भी गुट इसका इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। एक ओर जहां ममता गुट को ममता तृणमूल कांग्रेस नाम मिला और चिह्न फुटबॉल खिलाड़ी रहा। वहीं, बागी गुट ने ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम रखा। पार्टी का चिह्न लिफाफा है।
प्रकाशित: गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 | 1:04 PM IST

