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बसपा पूंजीपतियों को टिकट नहीं देती, मायावती का सपा पर कटाक्ष

मायावती ने सपा पर परिवारवाद और धनबल के सहारे चुनाव लड़ने का आरोप लगाया।

झटपट समझें

बसपा प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी पर परिवारवाद और धनबल के सहारे चुनाव लड़ने का आरोप लगाते हुए कहा है कि बसपा ऐसे उम्मीदवारों को टिकट नहीं देती है।

मुख्य बातें

  • बसपा किसी भी चुनाव में परिवार, सगे-संबंधियों या बड़े पूंजीपतियों को टिकट नहीं देती है।
  • समाजवादी पार्टी ने राम गोपाल यादव (अखिलेश यादव के चाचा) को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है।
  • रिलायंस इंडस्ट्रीज ग्रुप के अध्यक्ष धनराज परिमल नाथवानी सपा के दूसरे उम्मीदवार हैं।
  • मायावती ने सपा पर 'पीडीए' की पार्टी होने का ढोंग करने का आरोप लगाया।
  • बसपा केवल गरीब, मध्यम वर्ग और कमजोर तबकों के आंबेडकरवादी लोगों को उम्मीदवार बनाती है।
बसपा पूंजीपतियों और रिश्तेदारों को टिकट नहीं देते, राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर मायावती का सपा पर तंज
बसपा प्रमुख मायावती ने राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन को लेकर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है।

बसपा की अध्यक्ष मायावती ने शुक्रवार को समाजवादी पार्टी द्वारा घोषित किए गए दो राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर तंज कसा। मायावती ने कहा कि बसपा कभी भी अपने परिवार के सगे-संबंधियों और बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों को टिकट नहीं देती है। समाजवादी पार्टी ने बुधवार को वरिष्ठ नेता और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के चाचा राम गोपाल यादव को उच्च सदन में एक और कार्यकाल के लिए उम्मीदवार बनाया है, वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज ग्रुप के अध्यक्ष धनराज परिमल नाथवानी को दूसरे उम्मीदवार के रूप में नामित किया है।

मायावती ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘बसपा किसी भी छोटे-बड़े चुनाव में विरोधी पार्टियों, खासतौर पर समाजवादी पार्टी की तरह अपने परिवार, सगे-सबंधी, भाई-भतीजों, क़रीबी रिश्ते-नातेदारों के साथ ही विशेषकर बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों आदि को टिकट नहीं देती है, यानी चुनाव में उनके धनबल का सहारा नहीं लेती है।’

राजनीतिक ढोंग करती है सपा मायावती ने कहा कि बसपा में कार्यरत सर्वसमाज में से केवल ग़रीब, मध्यम वर्ग व कमज़ोर तबक़ों के कर्मठ आंबेडकरवादी लोगों को ही पार्टी का उम्मीदवार बनाया जाता है, अर्थात बसपा की राजनीति परिवारवाद व धनबल से मुक्त व पाक-साफ है, जबकि वहीं दूसरी तरफ सपा ठीक इसके विपरीत कार्य करती है, जो अपने आपको समाजवादी व कथित 'पीडीए' (पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक) की पार्टी होने का 'राजनीतिक ढोंग व छलावा करती हुई' ज़्यादा नज़र आती है। बसपा नेता ने कहा, 'इसका एक और ताज़ा उदाहरण यह है कि सपा ने उप्र से राज्यसभा के लिये द्विवार्षिक चुनाव में रामगोपाल यादव को फिर से पर्चा भरवाया है जो सपा मुखिया के नज़दीकी रिश्तेदार हैं, जबकि सपा ने अपनी पार्टी का दूसरा उम्मीदवार धनराज परिमल नाथवानी को बनाया है, जो चर्चित उद्योग घराने से सम्बद्ध हैं।

चुनाव हारने के लिए होगा सपा का तीसरा उम्मीदवार लोगों की राय में सपा का तीसरा उम्मीदवार पहले की तरह संभवतः 'चेहरा बचाने' व चुनाव हारने के लिए होगा।' मायावती ने आरोप लगाया कि वास्तव में यह कोई नई बात नहीं है बल्कि सपा का इस प्रकार का दोहरा चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा से ही रहा है और इसलिये ख़ासकर उच्च जाति समाज के ग़रीबों तथा 'बहुजन समाज' अर्थात दलितों, आदिवासियों, अति-पिछड़ों, मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के समस्त लोगों को अब ख़ासकर उप्र विधानसभा चुनाव से पहले ही पूरी तरह से सतर्क हो जाना चाहिये।

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